हाई ब्लड प्रेशर बना साइलेंट किलर
बाल मुकुन्द ओझा
विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हर वर्ष 17 मई को मनाया जाता है। दरअसल आजकल की सभी बीमारियां खराब जीवनशैली से जुड़ी होती हैं, ऐसे में ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। ब्लड प्रेशर को मैनेज करने के लिए हमें लाइफ स्टाइल में सुधार करने की जरूरत होती है। उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन जिसे आम बोलचाल की भाषा में बीपी भी कहा जाता है, के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व उच्च रक्तचाप लीग ने विश्व उच्च रक्तचाप दिवस की शुरुआत की थी। डब्ल्यूएचएल ने 14 मई 2005 को पहला विश्व उच्च रक्तचाप दिवस शुरू किया था। 2006 से हर साल 17 मई को ही विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के रूप मनाया जाना तय किया गया .
विश्व उच्च रक्तचाप दिवस 2026 की थीम, उच्च रक्तचाप को मिलकर नियंत्रित करें रखी गई है। इसका मतलब है कि नियमित और सटीक रक्तचाप माप के महत्व पर जोर देना आवश्यक है। डॉक्टर के मुताबिक, हाईपरटेंशन के सही प्रबंधन की आधारशिला ही सटीक रक्तचाप माप है। सही मेजरमेंट बीपी को जल्दी पहचानने, प्रभावी ढंग से मैनेज करने और जोखिमों से बचने में मदद करता है। चिकित्सकों ने सही मेजरमेंट के लिए बताया है, बीपी चेक करने से पहले मरीज को कम से कम 5 मिनट तक आराम करने दें। बीपी चेक करवाते समय बातचीत न करें और मरीज की पीठ तथा हाथ ठीक से टिके हों। दो या अधिक बार बीपी चेक करें और औसत माप निकालें। घर पर बीपी मापना भी फायदेमंद होता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों में हाई ब्लड प्रेशर के प्रति जागरूक करना है। इस बीमारी ने अब घर घर दस्तक दे दी है जिस कारण इसे साइलेंट किलर भी कहा जाने लगा है। इसका कारण यह है कि कई बार बीपी के लक्षण शुरुआती चरणों में दिखाई नहीं देते हैं और यह धीरे-धीरे हार्ट, ब्रेन, किडनी एवं आंखों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
भारत की बात करें तो हमारा देश आजकल बीमारियों के देश के रूप में अपनी पहचान बनाता जा रहा है। इनमें एक बीमारी बीपी या उच्च रक्तचाप की है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में 30 करोड़ से अधिक लोग हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में 37 प्रतिशत मरीजों को अपनी बीमारी के बारे में पता है और 30 प्रतिशत हाईब्लड प्रेशर के लिए इलाज ले रहे हैं। भारत में केवल 15 प्रतिशत मरीजों का ब्लड प्रेशर कंट्रोल में है। यह बीमारी साइलेंट किलर के रूप में घर घर में देखने को मिल रही है। आज के आधुनिक परिवेश में ब्लड प्रेशर के मरीजों की तादाद दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। दौड़- भाग भरी जिंदगी, फॉस्ट फूड और अनियमित दिनचर्या की वजह से आजकल बच्चे से बुजुर्ग तक हर उम्र के लोगों में बीपी की समस्या देखने को मिल रही है। और वैसे तो ब्लड प्रेशर की बीमारी मामूली सी लगती है लेकिन अगर इसपर काबू न पाया गया तो यह समस्या दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी का कारण भी बन सकती है। ब्लड प्रेशर कम हो या ज्यादा दोनों ही ख़तरनाक होते हैं। इसलिए डॉक्टर द्वारा अक्सर यह सलाह दी जाती है की आप नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाते रहें। देश में ज्यादा नमक ने दिल का और हाई ब्लडप्रेशर मरीज बना दिया है। 25 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में भारत में नमक का औसत सेवन 10 ग्राम प्रतिदिन है। जबकि WHO के मुताबिक एक व्यक्ति को एक दिन में 5 ग्राम या उससे भी कम नमक खाना चाहिए। लेकिन भारतीय रोजाना डबल डोज में नमक खा रहे हैं, जिसमें पुरुष औसतन 11 ग्राम और महिलाएं 9 ग्राम नमक खा रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक ऐसे लोग जिनका ब्लड प्रेशर 140/90 से ज्यादा रहता है वो हाईब्लड प्रेशर के मरीज माने जाते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक अगर 50 प्रतिशत लोगों को कंट्रोल ब्लड प्रेशर वाले दायरे में लाया जा सका तो 2023 से 2050 के बीच होने वाली 76 मिलियन यानी साढे सात करोड़ लोगों की असमय मौतों को टाला जा सकेगा। इससे दुनिया भर में 12 करोड़ लोगों को स्ट्रोक से बचाया जा सकेगा। 8 करोड़ हार्ट अटैक टाले जा सकेंगे। तकरीबन 1 करोड़ 70 लाख हार्ट फेल होने से बचाए जा सकेंगे।
बीपी के रोग से बचने के लिए जागरूकता के साथ समय पर उपचार जरुरी है। नमक कम खाएं, तंबाकू सहित सैचुरेटेड और ट्रांस फैट, शराब से बचें और नियमित रूप से फल और सब्जियां खाएं। इसके अलावा नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम भी काफी फायदेमंद होगा।