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आंध्र मेडिकल कॉलेज-KGH में बढ़ीं स्वास्थ्य सुविधाएं, केंद्र की योजनाओं से मिला सहारा

आंध्र मेडिकल कॉलेज-KGH में बढ़ीं स्वास्थ्य सुविधाएं, केंद्र की योजनाओं से मिला सहारा

 

  • आंध्र मेडिकल कॉलेज-KGH में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ।
  • 50-बेड क्रिटिकल केयर ब्लॉक पर 23.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
  • केंद्रीय सहायता से मेडिकल शिक्षा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली।

 

विशाखापट्टनम. विशाखापट्टनम का आंध्र मेडिकल कॉलेज (AMC) और किंग जॉर्ज हॉस्पिटल (KGH) करीब एक सदी से क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। वर्ष 1923 में शुरू हुआ यह संस्थान अब इलाज के साथ मेडिकल शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। इसके विस्तार में आंध्र प्रदेश सरकार के साथ केंद्र की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं और वित्तीय सहायता की भी भूमिका रही है।

किंग जॉर्ज हॉस्पिटल का उद्घाटन 19 जुलाई 1923 को हुआ था। समय के साथ यह अस्पताल विशाखापट्टनम ही नहीं, बल्कि आसपास के कई क्षेत्रों के मरीजों के लिए प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्र बन गया। आंध्र मेडिकल कॉलेज से जुड़े इस अस्पताल में मरीजों के इलाज के साथ मेडिकल विद्यार्थियों को क्लीनिकल प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

केंद्र की सहायता से विकसित प्रमुख सुविधाओं में 50-बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक शामिल है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना के लिए कुल 23.75 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए। इसमें 16.75 करोड़ रुपये भवन और अन्य सुविधाओं के लिए, जबकि 7 करोड़ रुपये चिकित्सा उपकरणों के लिए निर्धारित किए गए।

यह क्रिटिकल केयर सुविधा National Health Mission यानी NHM के तहत विकसित की गई। इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ाना है। परियोजना में जरूरत के मुताबिक मानव संसाधन उपलब्ध कराने का प्रावधान भी NHM के माध्यम से किया गया था।

 

आंध्र मेडिकल कॉलेज-KGH में बढ़ीं स्वास्थ्य सुविधाएं, केंद्र की योजनाओं से मिला सहारा

KGH में बड़ी संख्या में गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में क्रिटिकल केयर ब्लॉक जैसी सुविधा अस्पताल की उपचार क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। आधुनिक उपकरणों के साथ गंभीर मरीजों की निगरानी और उपचार के लिए अतिरिक्त व्यवस्था मिलने से अस्पताल के क्रिटिकल केयर ढांचे को मजबूती मिली है। आंध्र प्रदेश के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन यानी PM-ABHIM के जरिए भी मजबूती दी गई है। इस योजना का उद्देश्य महामारी और अन्य स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता बढ़ाना है।

आंध्र मेडिकल कॉलेज-KGH में बढ़ीं स्वास्थ्य सुविधाएं, केंद्र की योजनाओं से मिला सहारा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, आंध्र प्रदेश में PM-ABHIM के तहत 10 Critical Care Blocks और 12 Integrated Public Health Laboratories की परियोजनाओं को स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए जोड़ा गया है। आंध्र मेडिकल कॉलेज और KGH भी राज्य की इस व्यापक क्रिटिकल केयर व्यवस्था से जुड़े हैं। केंद्र की मदद केवल अस्पताल की उपचार सुविधाओं तक सीमित नहीं रही। मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी आंध्र मेडिकल कॉलेज के उन्नयन के लिए केंद्रीय सहायता दी गई। Centrally Sponsored Scheme के तहत मेडिकल कॉलेज के उन्नयन और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा की क्षमता बढ़ाने से जुड़ी परियोजना स्वीकृत की गई थी। केंद्रीय रिकॉर्ड के मुताबिक इस परियोजना की कुल लागत 14.42 करोड़ रुपये थी, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 10.82 करोड़ रुपये था। इस तरह की परियोजनाओं का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित करने के साथ विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा के लिए क्षमता बढ़ाना है। KGH की सेवाएं राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से भी जुड़ी हुई हैं। National AIDS Control Organisation यानी NACO के रिकॉर्ड में अस्पताल में ART Centre का उल्लेख है। इन केंद्रों के माध्यम से HIV से संक्रमित मरीजों को एंटीरेट्रोवायरल उपचार, दवाओं और आवश्यक चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा जाता है। National Health Mission के जरिए भी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को कई स्तरों पर सहयोग मिलता है। इसके तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, संक्रामक रोगों की रोकथाम, मुफ्त दवाएं और जांच, आपात स्वास्थ्य सेवाएं, डायलिसिस तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के मानव संसाधन जैसी व्यवस्थाओं को सहायता दी जाती है। इस वजह से KGH जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में केंद्र की भूमिका किसी एक भवन या परियोजना तक सीमित नहीं रहती। अलग-अलग राष्ट्रीय कार्यक्रमों और योजनाओं के जरिए स्वास्थ्य सुविधाओं, उपकरणों, मानव संसाधन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में केंद्रीय सहायता जुड़ती है। हालांकि अस्पताल का प्रशासन और रोजमर्रा का संचालन आंध्र प्रदेश सरकार के अधीन है। केंद्र सरकार KGH का दैनिक प्रशासन नहीं चलाती। राज्य सरकार मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी संभालती है, जबकि केंद्र की योजनाएं वित्तीय सहायता, स्वास्थ्य अवसंरचना और राष्ट्रीय कार्यक्रमों के जरिए सहयोग देती हैं। आंध्र मेडिकल कॉलेज-KGH की एक और महत्वपूर्ण भूमिका डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार करने की है। यहां इलाज और चिकित्सा शिक्षा साथ-साथ चलती है। संस्थागत जानकारी के अनुसार कॉलेज में 250 MBBS, 212 MD/MS और 25 DM/MCh सीटों का उल्लेख है। मेडिकल विद्यार्थियों को अस्पताल में मरीजों के बीच व्यावहारिक और क्लीनिकल प्रशिक्षण का अवसर मिलता है। समय के साथ KGH में न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी, इमरजेंसी मेडिसिन और क्रिटिकल केयर जैसी विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार हुआ है। इससे अस्पताल की भूमिका केवल सामान्य सरकारी अस्पताल तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह विशाखापट्टनम क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सा और मेडिकल शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। 1923 में शुरू हुआ यह संस्थान अब आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। 23.75 करोड़ रुपये के 50-बेड क्रिटिकल केयर ब्लॉक, मेडिकल कॉलेज के उन्नयन के लिए 10.82 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी और राष्ट्रीय HIV नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़ी सेवाएं बताती हैं कि केंद्र की योजनाओं की मौजूदगी यहां अलग-अलग स्तरों पर दिखाई देती है। आंध्र मेडिकल कॉलेज और KGH की कहानी इसलिए केवल एक पुराने अस्पताल के विस्तार की कहानी नहीं है। यह चिकित्सा शिक्षा, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं, विशेषज्ञ उपचार और केंद्र-राज्य सहयोग के साथ विकसित हो रहे स्वास्थ्य ढांचे की तस्वीर भी पेश करती है। आने वाले समय में नई स्वास्थ्य परियोजनाओं और आधुनिक तकनीक के जुड़ने से इस संस्थान की सेवाओं का दायरा और बढ़ सकता है।

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