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राजस्थान दिवस का उत्सवी आगाज

राजस्थान दिवस का उत्सवी आगाज

राज्य की भजनलाल सरकार ने हिन्दू नववर्ष (वर्ष प्रतिपदा) पर राजस्थान स्थापना दिवस मनाने का उत्सवी आगाज किया है। राज्य सरकार जनभागीदारी के साथ राजस्थान दिवस मनाने जा रही है। 30 मार्च को मनाया जाने वाला राजस्थान दिवस इस बार 19 मार्च को मनाया जाएगा। यह निर्णय हिंदू पंचांग के अनुसार लिया गया है, क्योंकि इस दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है, जिसे भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। प्रत्येक वर्ष 30 मार्च को हम राजस्थान की अमर गाथा का अपनी सुनहरी यादों में समरण कर इसे राजस्थान दिवस के रूप में मानते है। मगर इस साल से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर यह दिवस मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक निर्णय का प्रदेशवासियों ने स्वागत किया है। इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर यह दिवस 19 मार्च को ही पड़ रहा है। हम प्रदेश के उत्तरोत्तर विकास और नव निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ते है। प्रदेशभर में 14 मार्च से 19 मार्च तक विविध कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश के गरीब, युवा, महिला और किसानों को विशेष सौगातें दी जा रही है। ये कार्यक्रम 19 मार्च तक अलग-अलग जिलों में आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, जनकल्याण योजनाओं के कार्यक्रम और जनभागीदारी से जुड़े आयोजन शामिल रहेंगे।
इंग्लैण्ड के विख्यात कवि किप्लिंग का मानना था कि दुनिया में अगर कोई ऐसा स्थान है, जहां वीरों की हड्डियां मार्ग की धूल बनी हैं तो वह राजस्थान है। यह हमारे इतिहास की सच्चाई है। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की परम्परा आज भी राजस्थान में कायम है।
राजस्थान अपनी आन, बान,शान, शौर्य, साहस, कुर्बानी, त्याग, बलिदान तथा वीरता के लिए सम्पूर्ण विश्व में ख्यात है। राजस्थान के लोग अपनी कड़ी मेहनत के लिए जाने जाते हैं। भौगोलिक विषमताओं और प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद यहां के नागरिकों की दृढ़ इच्छा शक्ति और आपसी सहयोग से प्रदेश का चहुंमुखी विकास हो सका है। राजस्थान में गरीब लोगों के सामाजिक, आर्थिक स्थिति में सुधार, संसाधनों में वृद्धि और राजनीति, व्यवसाय आदि सभी क्षेत्रों में विकास, हमारी खुशहाली के प्रतीक हैं। राजपूताना कहे जाने वाले राजस्थान का इतिहास गौरवशाली रहा है जिस पर हर प्रदेशवासी को गर्व है। मातृ भूमि की रक्षा एवं परम्पराओं तथा संस्कृति को अक्षुण्ण बनाये रखने में यहां के लोगों ने सदैव पहल की है। राजस्थान की कला, साहित्य और सांस्कृतिक पृष्ठ भूमि विश्व में अपनी अलग पहचान रखती है। राजस्थान इस वर्ष अपना 69 वां स्थापना दिवस मना रहा है। कला-संस्कृति, पर्यटन व्यापार, खेल और खेती सभी क्षेत्रों में सबसे आगे हैं राजस्थानी।
30 मार्च 1949 को राजपूताने के गठन की प्रक्रिया के साथ ही एक नवम्बर 1956 को राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई। 30 मार्च को प्रदेशवासी राजस्थान दिवस के रूप में मनाते हैं और अतीत के साथ साथ अपने वर्तमान को याद करते हैं। इस अवधि में राजस्थान में हुई प्रगति, विकास और उल्लेखनीय उपलब्धियों का गुणगान करते हैं। राज्य सरकार इस बार साप्ताहिक महोत्सव के रूप में प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रमों आयोजन कर प्रदेशवासियों को जन कल्याण की सौगातें दे रही है।
यह सही है कि हमने हर क्षेत्र में प्रगति हासिल की है। स्कूलों की संख्या बढ़ी है। छात्रों का नामांकन भी दुगुना-चौगुना हुआ है। राशन सस्ता हुआ है। विद्युत के क्षेत्र में भी हम आगे बढ़े हैं। विद्युत क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है। गांव-गांव और घर-घर बिजली की रोशनी प्रज्जवलित हुई है। सड़कों का जाल भी चहुंओर देखने को मिल रहा है। गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ा गया है। पेयजल के क्षेत्र में अच्छी खासी प्रगति हुई है। गांव-गांव और शहर-शहर में पानी पहुंचाया गया है। दूर दराज के क्षेत्रों में पानी पहुंच रहा है। जो गांव पेयजल के लिए सिर्फ वर्षा पर आधारित थे वहाँ जल विभाग की योजनाओं के जरिये पानी पहुंचाया जा रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्रों में बड़ी कामयाबी हासिल की गई है। गांव-गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाया गया है। आज लगभग सभी ग्रामों में स्वास्थ्य की सुविधा पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। मैट्रो सिटी में बड़े अस्पताल बनाये गये हैं और जटिल से जटिल रोगों का ईलाज किया जा रहा है। औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी हम आगे बढ़े हैं। रेगिस्तानी क्षेत्र राजस्थान में पहले लोग उद्योग धंधे स्थापित करने से डरते थे। आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने और लालफीताशाही के कारण उद्योगपति राजस्थान आने से डरते थे। यहाँ तक कि प्रवासी उद्योगपति भी अपने क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने में हिचकिचाते थे। मगर आज आधारभूत सुविधाएँ सुलभ होने के कारण राजस्थान में बड़ी तेजी से बड़े और वृहद् उद्योग स्थापित हुए हैं। औद्योगिक विकास के क्षेत्र में राजस्थान का काया कल्प हुआ हे। हमारे लाखों नौजवानों को रोजगार मिला है। राजस्थान दिवस के अवसर पर हमें प्रगति के साथ साथ प्रगति के अवरोधों पर भी गंभीरता से चिन्तन और मनन करना चाहिये।


-बालमुकुन्द ओझा

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