नशा मुक्त भारत अभियान, सेमीनार का हुआ आयोजन
अजमेर । नशा मुक्त भारत अभियान के अन्तर्गत सोमवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा न्यू आदर्श शिक्षा समिति के तत्वाधान में लघु सेमीनार का आयोजन अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में हुआ। नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया भी गया।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उप निदेशक प्रफुल्ल चन्द्र चौबीसा ने बताया कि सोमवार को अन्तर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया गया। इस उपलक्ष्य मेें लघु सेमीनार का आयोजन हुआ। इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेन्द्र सिंह ने की। कार्यशाला में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यो के सम्बन्ध में चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि नशा थकान दूर नहीं करता बल्कि व्यक्ति की मांस पेशियों थकती है लेकिन महसूस नहीं होता। नशे से नींद तो आती है लेकिन कृत्रिम तथा ताजगी देने वाली नहीं होती है। नशा करने वाले व्यक्तियों में तात्कालिक उत्तेजना मस्तिष्क में होती है। लम्बे समय तक नशा करने से नपुसंकता आ जाती है। नशे में लिप्त स्ति्रयों में मां बनने की क्षमता कम हो जाती है। नशे से सृजनशीलता कम होती है। बहुत से कलाकारों का उपचार करते समय यह पाया गया कि व्यसन शुरू होने के बाद उनकी कलाकृतियां पहले की तुलना में घटिया स्तर की है। नशा एक झूठी शान है। आमतौर पर नशा करने वाले व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार हो जाता है, ताने सुनने पड़ते है। कमजोर पर्सनलटी वाले व्यक्ति गलत संगत को नकारने की हिम्मत नही कर पाते है। नशे से मजा व खुशी नष्ट होती है। व्यसनी हमेशा के लिए दुःखी एवं दयनीय हो जाता है। नशा करने से अच्छे मित्र साथ छोड़ देते है। नशे से केवल कमजोरी तथा बीमारी ही हाथ लगती है। नशेड़ी आत्मसम्मान और विश्वास खो बैठता है। नशे से व्यापार चौपट हो जाता है बाजार में विश्वसनीयता खो बैठता है। नशे का व्यसन एक मानसिक रोग है। इसका उपचार सम्भव है।
उन्होंने बताया कि हर वर्ष लगभग 1.6 लाख से ज्यादा लोगों की मौत नशे की ओवरडोज के कारण हो जाता है। जिसमेें आधे से ज्यादा व्यक्तियों की उम्र 50 वर्ष से कम होती है। नशा एक सामाजिक बुराई है। यह व्यक्ति को धीरे-धीरे अपने शिकंजे में जकड़ लेता है। उसको शारीरिक रूप से बीमार और मानसिक रूप से भिखारी बना देता है। नशा करने वाले व्यक्ति का पूरा परिवार बिखर जाता है। पत्नी और बच्चे दाने-दाने का मोहताज हो जाते है। बच्चों की शिक्षा व प्रगति रूक जाती है।
उन्होेंने बताया कि इसे छोड़ने के लिए दृढ़ संकल्प लें। तम्बाकु, सिगरेट, बीड़ी, शराब, बीयर, ब्राउन शुगर, अफीम, फोर्टविन इंजेक्शन, गांजा भांग, चरस, नींद की गोलियां आदि प्रमुख प्रकार के प्रचलित नशे है। नशे के अधिक सेवन करने के पश्चात व्यक्ति को प्रारम्भ में क्षणिक खुशी और उत्तेजना का आभास होता है। लेकिन बाद में उनकी चेतना, भावनाओं एवं व्यवहार में अस्थिरता रहती है। कभी-कभी वह नशे के पश्चात अभद्र व्यवहार करते है। लम्बी अवधि तक नशे के कारण व्यक्ति को आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं वैधानिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है एवं धीरे-धीरे उसके अपने व्यक्तिव का भी हास होता हैै। उसका जीवन स्तर गिर जाता है। अधिकतर मादक द्रव्य हमारे केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र पर बुरा असर करते हैै। यह मस्तिष्क के कार्यो को परिवर्तित कर सकते हैं। शराब के दीर्घकालीन सेवन से व्यक्ति के लीवर पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
इस अवसर पर सामाजिक एवं न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक डॉ. अभिषेक, सीडीपीओ विमलेश डेरानी, मंजु शिवनानी, जेएलएन के अधीक्षक डॉ. नीरज गुप्ता, अतिरिक्त सीएमएचओ डॉ. रामस्वरूप किराड़िया, डॉ. विजय कुमार सैनी, तम्बाकु निषेध कार्यक्रम की जिला सलाहकार डॉ. पुनिता जैफ, न्यू आदर्श शिक्षा समिति के रेखा जादम, अंशुल श्रीवास्तव एवं शेलेन्द्र गर्ग उपस्थित थे।