चीन का प्रॉपर्टी संकट गहराया, घर खरीदारों पर बढ़ा दबाव
नई दिल्ली। चीन का रियल एस्टेट बाजार लंबे समय से दबाव में है और इसका असर अब आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति पर भी दिखाई देने लगा है। 'द डिप्लोमैट' में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, देश की सरकार की ओर से इस संकट को लेकर पर्याप्त सार्वजनिक चर्चा नहीं होने से उन लाखों-करोड़ों लोगों की परेशानी बढ़ रही है, जिन्होंने अपनी बचत और कर्ज के जरिए घर खरीदे हैं।
लेख में दावा किया गया है कि प्रॉपर्टी बाजार में गिरावट के चलते कई खरीदार ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां उनके लिए घर बेचना या मौजूदा कर्ज को दोबारा व्यवस्थित करना मुश्किल हो गया है। कई लोगों पर लोन का बोझ बना हुआ है, जबकि उनकी संपत्ति का मूल्य पहले के मुकाबले कम हो चुका है।
रिपोर्ट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शंघाई दौरे का भी उल्लेख किया गया है। लेख के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित किया, लेकिन प्रॉपर्टी बाजार में जारी मंदी का प्रमुखता से जिक्र नहीं किया। इसी को लेकर चीन की आर्थिक नीतियों और रियल एस्टेट संकट पर सवाल उठाए गए हैं।
चीन के रियल एस्टेट बाजार की कमजोरी का अंदाजा बिल्डरों की बिक्री से भी लगाया जा सकता है। लेख में 'चाइना रियल एस्टेट इंफॉर्मेशन' के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि शीर्ष 100 डेवलपर्स की नए घरों की बिक्री में साल-दर-साल करीब 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि चीनी अधिकारियों ने निजी डेटा प्रदाताओं से घरों की बिक्री के आंकड़े सार्वजनिक करना बंद करने को कहा।
हालांकि कुछ प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लेख में कहा गया कि चीन में बड़ी संख्या में अपार्टमेंट खाली या अधूरे पड़े हैं, जो रियल एस्टेट सेक्टर पर भारी बोझ बने हुए हैं।
चीन की अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर केनेथ रोगॉफ के अनुसार, रियल एस्टेट लंबे समय से चीन के आर्थिक विकास मॉडल की बुनियाद रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर को भी इसमें शामिल किया जाए तो यह देश की कुल मांग के करीब एक-तिहाई हिस्से से जुड़ा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, संकट का सबसे बड़ा असर संपत्ति और उपभोक्ता व्यवहार पर पड़ रहा है। चीनी परिवार अपनी कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा आवासीय संपत्तियों में रखते हैं। ऐसे में घरों की कीमत घटने से लोगों को खुद की आर्थिक स्थिति कमजोर महसूस होने लगती है और वे खर्च कम करने लगते हैं।
रियल एस्टेट सेक्टर में कमजोरी का असर केवल घर खरीदारों तक सीमित नहीं है। निर्माण, बैंकिंग, स्थानीय सरकारों की आय और घरेलू खपत जैसे कई क्षेत्र इससे जुड़े हुए हैं। ऐसे में चीन के लिए प्रॉपर्टी संकट को संभालना आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की बड़ी चुनौती बन गया है।