पनामा नहर पर चीन की नजर, ट्रंप बोले- ऐसा कभी नहीं होने देंगे
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर पनामा नहर को लेकर अपनी पुरानी आपत्तियां दोहराते हुए कहा कि चीन इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।
नॉर्थ डकोटा के मेडोरा में आयोजित Theodore Roosevelt Presidential Library के उद्घाटन समारोह में ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Theodore Roosevelt की सराहना करते हुए पनामा नहर को अमेरिका की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल महंगी थी, बल्कि अमेरिका के लिए बेहद लाभदायक भी साबित हुई।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि नहर का नियंत्रण मिलने के बाद पनामा ने जहाजों से वसूले जाने वाले ट्रांजिट शुल्क में कई बार बढ़ोतरी की। उनके अनुसार, शुल्क बढ़ने के बावजूद नहर का उपयोग कम नहीं हुआ और वैश्विक व्यापार के लिए इसकी अहमियत लगातार बनी रही।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पनामा नहर को पनामा को सौंपने का फैसला गलत था। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर किसी नई नीति या कार्रवाई की घोषणा नहीं की, लेकिन यह जरूर दोहराया कि उनकी सरकार इस रणनीतिक मार्ग पर चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
पनामा नहर का निर्माण 20वीं सदी की शुरुआत में अमेरिका ने कराया था। वर्ष 1977 में हुई संधि के तहत अमेरिका ने चरणबद्ध तरीके से इसका नियंत्रण पनामा को सौंपने का फैसला किया और 31 दिसंबर 1999 को यह प्रक्रिया पूरी हो गई। वर्तमान में नहर का संचालन Panama Canal Authority द्वारा किया जाता है।
करीब 82 किलोमीटर लंबी पनामा नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ती है और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग पांच प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नहर में किसी भी तरह का व्यवधान या शुल्क में बदलाव अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला और भारत समेत कई देशों के व्यापार पर असर डाल सकता है।