SIR विवाद पर भाजपा का राहुल गांधी पर हमला
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के विपक्षी गठबंधन के कदम पर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर लिया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रही है और चुनाव आयोग तथा न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष रामचंद्र राव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पहले ही दिशा-निर्देश दे चुका है और चुनाव आयोग उनका पालन कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के बाद फॉर्म-6 में बदलाव और नए प्रावधान जोड़ने का काम भी शीर्ष अदालत के निर्देशों के अनुरूप किया गया था।
रामचंद्र राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इन प्रक्रियाओं को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रही है। उनका कहना था कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन उन्हें न्यायपालिका और चुनाव आयोग की गरिमा से जोड़ना उचित नहीं है।
‘सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक विवाद सुलझाने का मंच नहीं’
रामचंद्र राव ने विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष को एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित शिकायत है, तो वह कानूनी रास्ता अपना सकता है और वकीलों के माध्यम से अदालत में याचिका दाखिल कर सकता है।
भाजपा नेता के अनुसार, राजनीतिक विवादों को लेकर अदालत तक मार्च करना उचित नहीं है। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान को जरूरी बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को अपने मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक खींचतान का हिस्सा बनाने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, न्यायपालिका की निष्पक्षता और संस्थागत गरिमा लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
जगदंबिका पाल बोले- अदालत के दरवाजे सभी के लिए खुले
भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने भी विपक्षी गठबंधन के मार्च पर प्रतिक्रिया दी। एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की उस टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं।
हालांकि, जगदंबिका पाल ने राहुल गांधी के मार्च के तरीके पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश में पहले कभी किसी विपक्षी नेता ने इस तरह न्यायपालिका तक मार्च करने का रास्ता अपनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को संविधान, संसदीय परंपराओं और न्यायपालिका की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता के महत्व को समझना चाहिए।
भाजपा सांसद ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, किसी मुद्दे पर असहमति जताने और कानूनी उपाय अपनाने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन विरोध का तरीका भी संस्थाओं की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए।
संजय सरावगी ने भी साधा निशाना
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने विपक्षी गठबंधन के मार्च को लेकर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों पर भीड़ जुटाकर सुप्रीम कोर्ट पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। सरावगी ने कहा कि अदालत में लंबित मामलों को लेकर राजनीतिक ज्ञापन सौंपने के प्रयास पर पहले ही आपत्ति जताई जा चुकी है।
उन्होंने राहुल गांधी के साथ अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव के शामिल होने का जिक्र करते हुए इसे विपक्ष की राजनीतिक हताशा बताया। सरावगी ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर फेंकने वालों को लोकतंत्र का प्रतिनिधि बताने पर भी सवाल उठाए। ये आरोप भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अपने बयान में लगाए हैं।
पत्रकार से कथित धक्का-मुक्की पर भी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के दौरान राहुल गांधी पर एक पत्रकार को धक्का देने के आरोपों को लेकर भी संजय सरावगी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी के व्यवहार और प्रदर्शन के दौरान सामने आए घटनाक्रम पर सवाल उठाए।
सरावगी ने आरोप लगाया कि इस दौरान एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ अनुचित व्यवहार किया गया और कांग्रेस के एक कार्यकर्ता के साथ भी मारपीट जैसी स्थिति दिखाई दी। उन्होंने राहुल गांधी के कथित व्यवहार को अस्वीकार्य बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर निशाना साधा।
हालांकि, पत्रकार और पुलिस अधिकारी से जुड़े घटनाक्रम को लेकर संजय सरावगी ने जो बातें कही हैं, वे उनके आरोप और राजनीतिक बयान हैं।
एसआईआर को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच बढ़ती बयानबाजी ने चुनाव प्रक्रिया तथा संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। भाजपा जहां विपक्ष के मार्च को अनुचित बताते हुए न्यायपालिका की गरिमा का मुद्दा उठा रही है, वहीं एसआईआर में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष की आपत्तियां इस विवाद का प्रमुख आधार बनी हुई हैं।