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ईरान संकट के बीच अमेरिका का बड़ा कदम, युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन रवाना

ईरान संकट के बीच अमेरिका का बड़ा कदम, युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन रवाना

वाशिंगटन। अमेरिका ने अशांत ईरान में फिलहाल हमला न करने का संकेत जरूर दिया है पर उसने अपने सबसे शक्तिशाली युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) रवाना किया है। मध्य पूर्व क्षेत्र में सामान्यतः बहरीन, साइप्रस, मिस्र, ईरान, इराक, इजराइल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात और यमन जैसे देश हैं। यह क्षेत्र तीन महाद्वीपों एशिया, अफ्रीका और यूरोप के संगम पर है। अब्राहम लिंकन अपनी परमाणु ऊर्जा और व्यापक मारक क्षमता के लिए जाना जाता है। यह बिना सेना की मदद से तबाही मचाने में सक्षम है। सीएनएन चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान में हालात सामान्य होने के संकेत दिख रहे हैं, लेकिन कुछ ईरानियों का कहना है कि हफ्तो तक सरकार विरोधी प्रदर्शनों और क्रूर कार्रवाई के बाद वे अभी भी अमेरिका के संभावित दखल के लिए तैयार हैं। एक खाड़ी अधिकारी ने बताया कि पिछले 72 घंटों में जोरदार कूटनीतिक कोशिश के बाद कई अरब देशों ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम करने में मदद की। व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोई भी विकल्प खत्म नहीं किया है। अगर ईरान में हत्याएं जारी रहीं तो गंभीर नतीजे होंगे। एक सूत्र के अनुसार, तनाव के बीच अमेरिकी सेना एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को मिडिल ईस्ट भेज रही है। अमेरिका स्थित एक मानवाधिकार समूह के अनुसार, ईरान में प्रदर्शन के दौरान कम से कम 2,400 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। सत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सारे विकल्प खुले रखे हैं। यूएसएस अब्राहम लिंकन को आखिरी बार दक्षिण चीन सागर में देखा गया था। यह फारस की खाड़ी से लगभग 5,000 मील दूर है। विश्लेषकों का अनुमान है कि इसे खाड़ी तक पहुंचने में पांच से सात दिन लग सकते हैं। अमेरिकी नौसेना संस्थान के फ्लीट ट्रैकर के अनुसार, 100,000 टन से ज्यादा वजन और लगभग 1,100 फीट लंबा अब्राहम लिंकन 90 विमानों और हेलीकॉप्टरों ले जा सकता है। इनमें एफ/ए-18 और एफ-35 फाइटर जेट शामिल हैं। अब्राहम लिंकन के साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर हैं। कैरियर के लिए हवाई और पनडुब्बी सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ, अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर दर्जनों टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं। यह मिसाइलें 1,000 मील दूर तक के लक्ष्य को निशाना बना सकती हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा है, "राष्ट्रपति और उनकी टीम ने ईरानी सरकार को बता दिया है कि अगर हत्याएं जारी रहीं, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे।" उन्होंने बाद में कहा कि ट्रंप अपना इरादा जाहिर नहीं करते। लीविट ने कहा, "सच तो यह है कि सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप ही जानते हैं कि वह क्या करने वाले हैं और सलाहकारों की बहुत छोटी टीम को ही उनके इरादे की जानकारी है।" फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि ट्रंप ईरान की स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं। उन्होंने सभी विकल्प खुले रखे हैं। ईरान के साथ तनाव के बीच अमेरिका ने सैन्य साजो सामान मिडिल ईस्ट भेजा है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है।

 

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